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शिशà¥à¤“ं में कबà¥à¤œ होने के कà¥à¤¯à¤¾ कारण हैं?
शिशॠमें कॉनà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¤ªà¥‡à¤¶à¤¨ होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि:
फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध: फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीने वाले शिशॠको कबà¥à¤œ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध को पचा पाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है। इसकी वजह से मल कड़ा और बड़े आकार का आता है। फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध का बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड बदलने से à¤à¥€ कबà¥à¤œ की परेशानी हो सकती है। वहीं, दूसरी तरफ सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध पीने वाले शिशॠको कबà¥à¤œ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है। सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध पीने से à¤à¤¸à¤¾ मल बनता है, जो लगà¤à¤— हमेशा ही नरम होता है। चाहे शिशॠने कà¥à¤› दिनों से मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— न किया हो फिर à¤à¥€ पॉटी नरम ही होती है।
ठोस आहार शà¥à¤°à¥ करना: ठोस आहार का सेवन शà¥à¤°à¥ करने पर शिशà¥à¤“ं को अकà¥à¤¸à¤° कबà¥à¤œ हो जाता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका शरीर नठà¤à¥‹à¤œà¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ खà¥à¤¦ को वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ कर रहा होता है। जब आप शिशॠको ठोस आहार खिलाना शà¥à¤°à¥ करते हैं, तो आपको उसके पेय पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन à¤à¥€ बढ़ाना चाहिà¤à¥¤ कम फाइबर वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ या परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ तरल न पीने से शिशॠको कबà¥à¤œ हो सकता है। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ व पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार, कबà¥à¤œ को दूर रखने में अतà¥à¤¯à¤‚त सहायक हैं।
शरीर में पानी की कमी (डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨): हो सकता है शिशॠदांत निकलने, थà¥à¤°à¤¶ होने पर, गले में इनफेकà¥à¤¶à¤¨, सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम या कान के संकà¥à¤°à¤®à¤£ की वजह से दूध न पी रहा हो। या फिर हो सकता है आपका थोड़ा बड़ा शिशॠठोस आहार शà¥à¤°à¥ करने पर परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दूध या पानी न पी रहा हो। कारण चाहे कà¥à¤› à¤à¥€ हो, यदि आपका शिशॠपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ नहीं लेगा तो उसके शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसकी वजह से उसे सूखी और कड़ी पॉटी हो सकती है, जिसे करने में शिशॠको मà¥à¤¶à¥à¤•िल होगी।
बीमारी या सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿: कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤°, कबà¥à¤œ किसी à¤à¥‹à¤œà¤¨ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, à¤à¥‹à¤œà¤¨ विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ (जैसे कि बॉटà¥à¤²à¤¿à¤œà¥à¤®) या à¤à¥‹à¤œà¤¨ के अवशोषण में समसà¥à¤¯à¤¾ (मेटाबॉलिक डिसोरà¥à¤¡à¤°) की वजह से à¤à¥€ हो सकता है। कà¥à¤› दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मामलों में, शिशà¥à¤“ं में कबà¥à¤œ का कारण विशेष जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं, वह बीमारी जिसमें बड़ी आंत उचित ढंग से काम नहीं करती (हरà¥à¤¶à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¥‚नà¥à¤—ज़ डीजीज), वह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जिसमें गà¥à¤¦à¤¾ और मलदà¥à¤µà¤¾à¤° पूरी तरह से विकसित नहीं होते (à¤à¤¨à¥‹à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤² मैलफोरà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨), सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤¾ बिफिडा और सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• फाइबà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸à¥¤
शिशॠका कबà¥à¤œ उपचार कैसे करना चाहिà¤?
शिशॠकी असहजता कम करने के लिठकोई à¤à¥€ उपाय आजमान से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। हो सकता है डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको जांच के लिठबà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚। डॉकà¥à¤Ÿà¤° निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित कà¥à¤› घरेलू उपचारों को बारे में सलाह दे सकते हैं:
शिशॠकी टांगों को साइकिल चलाने के ढंग से घà¥à¤®à¤¾à¤à¤‚ इससे उसकी सखà¥à¤¤ पॉटी बड़ी आंत में से नरम होकर थोड़ा खिसकना शà¥à¤°à¥ हो सकेगी। शिशॠको पाचन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से राहत देने की लिठहमारे इस छोटे वीडियो में मालिश की तकनीकें सीखें। जब शिशॠअसहज हो, तो उसे तà¥à¤°à¤‚त आराम देने के लिठअकà¥à¤¸à¤° मालिश की ये तकनीकें आजमाई जा सकती हैं। कबà¥à¤œ से बचाव के लिठà¤à¥€ ये अचà¥à¤›à¤¾ उपाय हैं, इसलिठरोजाना शिशॠकी मालिश के दौरान नियमित तौर पर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ करें, ताकि शिशॠको इसका अधिकतम फायदा मिल सके।
अगर आपका शिशॠफॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीता है, तो उसे à¤à¤• से दूसरे फीड के बीच अतिरिकà¥à¤¤ पानी देती रहें। मगर, इसके लिठफॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध में ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी न मिलाà¤à¤‚। वहीं, बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पाउडर शिशॠके शरीर में पानी की कमी कर सकता है, जिससे कबà¥à¤œ हो सकता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको अलग बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड का फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध आजमाने की सलाह दे सकते हैं।
अगर आपके शिशॠने ठोस आहार लेना शà¥à¤°à¥ कर दिया है, तो उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में उबालकर ठंडा किया गया पानी और फलों का जलमिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ रस दें। आप उसे दो छोटी चमà¥à¤®à¤š सूखे आलूबà¥à¤–ारे (पà¥à¤°à¥‚न) का रस à¤à¥€ दे सकती हैं। आप à¤à¤• गिलास पानी में दो से तीन छोटी चमà¥à¤®à¤š चीनी मिलाकर à¤à¥€ शिशॠको दे सकती हैं। कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤° पानी में चीनी मिलाकर à¤à¥€ शिशॠको दिया जा सकता है, मगर à¤à¤¸à¤¾ शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर ही करें।
अपने थोड़े बड़े शिशॠके आहार में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में फाइबर शामिल करने स मदद मिल सकती है। पà¥à¤¯à¥‚री बनाकर या छोटे-छोटे हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में काटकर सेब, आड़ू, अंगूर, नाशपति, आलूबà¥à¤–ारा, किशमिश, रसà¤à¤°à¥€, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ शिशॠको दी जा सकती है। इन सà¤à¥€ में फाइबर उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। मà¥à¤¨à¤•à¥à¤•ा की पà¥à¤¯à¥‚री को विशेषकर फायदेमंद माना गया है। आप शिशॠके नियमित सीरियल में à¤à¤• या दो चमà¥à¤®à¤š यह पà¥à¤¯à¥‚री मिला सकती हैं। पालक, मटर, पतà¥à¤¤à¤¾à¤—ोà¤à¥€ जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ फाइबर से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होती हैं, इसलिठइनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शिशॠके आहार में शामिल करें। आप शिशॠके सामानà¥à¤¯ बà¥à¤°à¥‡à¤•फासà¥à¤Ÿ सीरियल में थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में उचà¥à¤š फाइबर वाले सीरियल à¤à¥€ शामिल कर सकती हैं।
यदि ये घरेलू उपचार काम न करें या फिर शिशॠका बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कबà¥à¤œ हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° रेचक (लैगà¥à¤œà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ) लेने की सलाह दे सकते हैं शिशॠको किसी à¤à¥€ तरह का लैगà¥à¤œà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ या सपोजिटरी देने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछ लें, चाहे फिर वह रेचक जड़ी-बूटी (हरà¥à¤¬à¤²) या होमियोपैथिक ही कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो।
इस सबके बावजूद, शिशॠको कबà¥à¤œ होने पर कोशिश करें कि आप जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिंतित न हों। शिशà¥à¤“ं को यदा-कदा कबà¥à¤œ हो ही जाता है, खासकर कि यदि वह फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पी रहा हो या उसने ठोस आहार खाना शà¥à¤°à¥ किया हो। आपके धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, उपचार और समय के साथ जलà¥à¤¦ ही शिशॠदोबारा सामानà¥à¤¯ और नियमित मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— करने लगेगा।
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